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    फेसबुक, इंस्टा, यूट्यूब... बैन! अपने देश में क्या अजब-गजब फैसला ले लिया?

    (Mukhi Deepak Kathuria) www.bharatdarshannews.com

    फेसबुक, इंस्टा, यूट्यूब... बैन! अपने देश में क्या अजब-गजब फैसला ले लिया?

    Bharat Darshan News, 13 December 2025 : दिस इज द एंड, होल्ड योर ब्रेथ एंड काउंट टू 10 जेम्स बॉन्ड फिल्म स्काईफॉल का टाइटल ट्रैक जिसे एडेल ने गाया है। ये गाना ज़िंदगी, मौत, और चुनौतियों से उबरने के बारे में है, जिसके इंड में मिलकर हर मुश्किल पार पाने का ज्जबा है, एकदम हैप्पी इंडिंग टाइप। लेकिन आज कल एक ऐसे देश में ये गाना खूब ट्रेडिंग हो गया है, जिसके मुखिया भारत के प्रधानमंत्री मोदी के न केवल अच्छे दोस्त हैं, बल्कि सार्वजनिक मंचों से उन्हें बॉस भी कहकर संदर्भित कर चुके हैं। हम बात दिल्ली से 10 हजार किलोमीटर दूर प्रशांत और हिंद महासागरों के बीच स्थित दुनिया के सबसे छोटे महाद्वीप ऑस्ट्रेलिया की कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में 16 से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन लागू हो गया है। सरकार ने 10 बड़े प्लेटफॉर्म्स पर ताला जड़ दिया है। यह दुनिया भर में इस तरह का पहला बैन है। इसके पहले आखिरी कुछ घंटों में सोशल मीडिया पर मातम जैसा माहौल था। बच्चों ने अपने फॉलोअर्स को आखिरी पैगाम दे दिया। किसी ने लिखा कि मैं तुम्हें बहुत याद करूंगा। किसी ने लिखा कि अब हम दूसरी दुनिया में मिलेंगे। कई बच्चों ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को अनफॉलो कर दिया। उनके अकाउंट से 6000 फॉलोवर्स कम हो गए। बच्चों ने कमेंट किया कि इंतजार करो जब हम वोट देने लायक होंगे तब बताएंगे।दुनिया में सोशल मीडिया से टीनएजर्स (16 से कम) को छुट्टी देने की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया से हो गई है। ऑस्ट्रेलिया पहला ऐसा देश बन गया, जहां अब अंडर 16 फेसबुक, इंस्टाग्राम यूट्यूब, एक्स, स्नैपचैट, टिकटॉक जैसे प्लैटफॉर्म नहीं चला सकेंगे। बुधवार से बैन पूरी तरह लागू हो गया है। सरकार के मुताबिक अब तक ऑस्ट्रेलिया में 2 लाख से ज्यादा टिकटोंक अकाउंट हटाए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि यह बैन बच्चों को उनका बचपन वापस दिलाएगा। UK और डेनमार्क भी सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने पर विचार कर रहे हैं। भारत समेत कई देशों में बहस शुरू हो गई है।कौन-कौन से प्लेटफॉर्म्स बंद हुए?

    फिलहाल ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इन 10 बड़े प्लेटफॉर्म्स की लिस्ट बनाई है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, थ्रेड्स, टिकटॉक, एक्स, यूट्यूब, रेडिट और स्ट्रीमिंग की दुनिया के दो बड़े नाम किक और Twitch। यह एक डायनामिक लिस्ट है। यानी वक्त के साथ इसे अपडेट किया जा सकेगा। ऑस्ट्रेलिया में स्नैपचैट पर 13 से 15 वर्ष की उम्र के करीब 4400 यूजर हैं। इसी एज ग्रुप में इंस्टाग्राम पर 3500, टिकटॉक पर 2 लाख और फेसबुक पर 1.5 लाख यूजर हैं। 10 दिसंबर से ये आंकड़े पूरी तरह बदल गए।

    क्रिसमस तक देखा जाएगा

    फेसबुक, इंस्टाग्राम, किक, रेडिट, स्नैपचैट, थ्रेड्स, टिकटॉक, एक्स, यूट्यूब और ट्विच जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म अगर 16 वर्ष से कम उम्र के ऑस्ट्रेलियाई बच्चों के अकाउंट को हटाने के लिए उचित कदम उठाने में नाकाम रहते हैं तो उन्हें 10 दिसंबर से 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (3.29 करोड़ अमेरिकी डॉलर यानी करीब 296 करोड़ रुपये) तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया क्रिसमस तक यह पुष्टि करेगा कि सोशल मीडिया पर बैन कारगर साबित हो रहा है या नहीं।

    मंत्री ने बच्चों को चेताया

    ऑस्ट्रेलिया की कम्युनिकेशन मिनिस्टर अनिका वेल्स ने कहा, 'आयु प्रतिबंधित प्लैटफॉर्म कानून से सहमत नहीं हो सकते है और यह उनका अधिकार है। हम शत-प्रतिशत समर्थन की उम्मीद नहीं करते है, लेकिन सभी ने कानून के पालन का वादा किया है। बुधवार तक ऑस्ट्रेलिया में 200,000 से अधिक टिकटॉक खाते डिएक्टिवेट हो चुके थे। वेल्स ने उन बच्चों को चेतावनी दी जो अब तक पकड़े जाने से बच गए है। वेल्स ने कहा कि अगर कोई बच्चा वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल करके नॉर्वे में होने का दिखावा करता है और नियमित रूप से ऑस्ट्रेलियाई समुद्र तटो की तस्वीरें पोस्ट करता है, तो पकड़ा जाएगा।हो रहा विरोध

    ऑस्ट्रेलियाई ह्यूमन राइट्स कमीशन का उनका कहना है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी का हनन है। मामला अदालत तक पहुंच गया है। दो 15 साल के बच्चों ने सरकार को चुनौती दे दी है। उन्होंने इस कानून के खिलाफ संवैधानिक मुकदमा दायर कर दिया है। तर्क है कि यह कानून उनके अधिकारों का हनन है। यह उन्हें अपनी बात कहने और राजनीतिक चर्चाओं में हिस्सा लेने से रोकता है। मानसिक स्वास्थ्य संस्थाओं ने भी इस बैन का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि कई बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक जीवन रेखा जैसा है। खासकर जो बच्चे समाज के हाशिए पर हैं जैसे एलजीबीटी क्यू समुदाय के बच्चे या वो जो दूरदराज के गांवों में अकेले रहते हैं उनके लिए यही प्लेटफार्म दुनिया से जुड़ने और मदद मांगने का जरिया है। अगर यह छीन लिया गया तो उनका अकेलापन और बढ़ जाएगा