(Mukhi Deepak Kathuria) www.bharatdarshannews.com

Bharat Darshan News, 17 January 2025 : श्रीगणेश की शुभदृष्टि से समस्त कष्ट नष्ट होते हैं और इसीलिए संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है। प्रतिमाह पूर्णिमा के पश्चात आने वाली कृष्णपक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी पुकारते हैं। संकट से मुक्ति मिलने को ही संकष्टी कहते हैं। भगवान श्रीगणेश के भक्त संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर सूर्योदय से चन्द्रोदय तक उपवास रखते हैं।
धर्मधारणा है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से सभी तरह के विघ्नों से मुक्ति मिल जाती है। श्रद्धालु संकष्टी चतुर्थी का कठोर व्रत करते हैं जिसमे केवल फलों, वनस्पति उत्पादों आदि का ही उपयोग किया जाता है। श्रद्धालु चन्द्रमा के दर्शन करने के पश्चात व्रत खोलते हैं।
॥ ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् ॥
॥ विनियोग ॥
ॐ अस्य श्रीऋण विमोचन महागणपति-स्तोत्रमन्त्रस्य शुक्राचार्य ऋषिः ऋण विमोचन महागणपतिर्देवता अनुष्टुप् छन्दः ऋण विमोचन महागणपति प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।
॥ स्तोत्र पाठ ॥
ॐ स्मरामि देवदेवेशंवक्रतुण्डं महाबलम्।
षडक्षरं कृपासिन्धुंनमामि ऋणमुक्तये॥1॥
महागणपतिं वन्देमहासेतुं महाबलम्।
एकमेवाद्वितीयं तुनमामि ऋणमुक्तये॥2॥
एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकंब्रह्म सनातनम्।
महाविघ्नहरं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥3॥
शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णंशुक्लगन्धानुलेपनम्।
सर्वशुक्लमयं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥4॥
रक्ताम्बरं रक्तवर्णंरक्तगन्धानुलेपनम्।
रक्तपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥5॥
कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णंकृष्णगन्धानुलेपनम्।
कृष्णयज्ञोपवीतं चनमामि ऋणमुक्तये॥6॥
पीताम्बरं पीतवर्णपीतगन्धानुलेपनम्।
पीतपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥7॥
सर्वात्मकं सर्ववर्णंसर्वगन्धानुलेपनम्।
सर्वपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥8॥
एतद् ऋणहरं स्तोत्रंत्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
षण्मासाभ्यन्तरे तस्यऋणच्छेदो न संशयः॥9॥
सहस्रदशकं कृत्वाऋणमुक्तो धनी भवेत्॥
-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर