हिन्दू राष्ट्र की स्थापना - अखिल भारत अभियान !     
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हिन्दू राष्ट्र की स्थापना - अखिल भारत अभियान !     
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Wednesday,29 August , 2018)

New Delhi  News, 28 August 2018 : भारत का गतवैभव, इतिहास तथा संस्कृति हिन्दू धर्म के अंग हैं; परंतु स्वतंत्रता के पूर्व से ही राज्यकर्ताओं ने हिन्दू धर्म को सम्मान प्राप्त नहीं होने दिया । अल्पसंख्यकों के मतों की लालच में राज्यकर्ताओं ने समय-समय पर अल्पसंख्यकों को इन सभी बातों का भागीदार बनाया तथा हिन्दुओं के इस वैभवसंपन्न देश के अप्रत्यक्षरूप से टुकडे किए । यह देश अखंड हिन्दू राष्ट्र था, इसपर आज की पीढी कभी विश्वास नहीं कर पाए, इतना राज्यकर्ताओंने इस देश का इतिहास, समाजव्यवस्था, राज्यव्यवस्था, कानूनव्यवस्था को बदलकर उसे धर्मनिरपेक्ष बना दिया है । इस देश को पुनः हिन्दू राष्ट्र का गौरव दिलाने के लिए हिन्दू जनजागृति समिति विगत एक दशक से भी अधिक समय से राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दुआें को संगठित करने का अविरत प्रयास कर रही है । इसके लिए एक ही समय पर समिति के अनेक स्थानों पर उपक्रम चल रहे होते हैं । उन्हीं में से एक है अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन ! वर्ष २०१२ में रामनाथी, गोवा में संपन्न हुए पहले अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन के पश्चात इस वर्ष ७ वां हिन्दू अधिवेशन संपन्न हुआ । अब उसी के ही एक भाग के रूप में समिति नई देहली में उत्तर भारत हिन्दू अधिवेशन का आयोजन कर रही है । वास्तव में देश की राजधानी में आयोजित यह अधिवेशन राष्ट्रीय स्तर का ही होगा । यहां उत्तर, पश्चिम तथा पूर्व भारत के हिन्दू संगठन विचारमंथन करेंगे।

भारत में हिन्दुओं के अल्पसंख्यक बनने का भय !

कश्मीरी हिन्दुओं का कश्मीर में पुनर्वास, समान नागरिक कानून, वहां से धारा ३७० को हटाना, घुसपैठ, ईसाई मिशनरियों द्वारा हिन्दुओं का किया जानेवाला धर्मांतरण इन सभी समस्याओं की ओर राज्यकर्ताओं ने कभी ध्यान ही नहीं दिया । इसलिए ये समस्याएं कभी छूटेंगी, इस पर हिन्दुओं को विश्वास नहीं है । काल के प्रवाह में हिन्दुओं पर आक्रमण बढते गए तथा उनमें लव जिहाद, लैन्ड जिहाद, गोहत्या, हिन्दू देवताओं का अनादर जैसी नए समस्याएं जुड गईं । अब उसमें भी पूर्वांचल के अधिकांश राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो गए हैं । संपूर्ण देश के कुल लोकसभा मतदाता-क्षेत्रों में से ३० प्रतिशत मतदाता-क्षेत्रों में मुसलमानों के मत निर्णायक सिद्ध होंगे, ऐसी स्थिति है । समान नागरिक कानून का क्रियान्वयन करने के विषय में राजनेताओं की दुर्बल नीति के कारण मुसलमानों की जनसंख्या हिन्दुओं की तुलना में दोगुनी-तिगुनी बढ गई है । अब उसके परिणाम दिखने लगे हैं । यदि स्थिति ऐसी ही रही, तो भारत में आगामी कुछ वर्षों में ही हिन्दू अल्पसंख्यक हो जाएंगे । भारत के कई क्षेत्रों में हिन्दुओं की संख्या अल्प होती जा रही है और उन क्षेत्रों में अब हिन्दुओं के साथ मुगल काल की भांति अत्याचार होने लगे हैं । पश्चिम बंगाल, इसका एक उत्तम उदाहरण है । हाल ही में यहां जिहादियों ने तीक्ष्ण शस्त्रों से हिन्दू महिला-पुरुषों की हत्या की, जबकि कुछ लोगों को जीवित जला दिया । इस समय मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने निष्क्रिय रहकर अप्रत्यक्ष रूप से इन घटनाओं को बढावा दिया । उत्तर प्रदेश में भी कुछ मात्रा में ऐसी ही स्थिति है । उत्तर प्रदेश में दादरी हो अथवा जम्मू के कठुआ का हत्याकांड हो, इन प्रकरणों में प्रसारमाध्यमों ने भी बिना वास्तविकता जाने हिन्दुओं की अपकीर्ति करने का भरपूर प्रयास किया ।

देश के शिक्षासंस्थानों में देशद्रोही विचारों का बढता प्रभाव चिंताजनक !

दूसरी ओर देहली के जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों में माओवादी विचारों को प्रोत्साहित कर उनका प्रचार-प्रसार किया जा रहा है । जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय भी इन्हीं माओवादी विचारधारा के छात्रों का अड्डा बन चुका है, जहां हिन्दुआ से कर के रूप में प्राप्त होनेवाले पैसों पर ये छात्र अनेक वर्ष शिक्षा लेते हैं और दूसरी ओर देश के टुकडे करने की बातें करते हैं । वे मन में ऐसी इच्छा रखकर समाज में कार्य करते हैं।

राजनीतिक दलों द्वारा निराशा !

आज तक किसी भी राजनैतिक दल ने हिंदू हितों के सूत्रों की ओर ध्यान नहीं दिया । हिंदुओं को   आश्वासन दिए गए लेकिन वह अब तक पूरे नहीं हुए । इसीलिए अब हिन्दुआ का संगठन बनाकर करोडों हिन्दुआ की एकजुटता दिखाकर राजनेताओं को भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है ।

हिन्दुत्वनिष्ठों का वज्र संगठन ही अब भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करेगा !  

इसलिए हिन्दू जनजागृति समिति ने विगत एक दशक से भी अधिक समय से हिन्दुओं को जागृत करने तथा हिन्दुओं का संगठन बनाने का यज्ञ आरंभ किया है । पूरा देश इसे एक अभियान के रूप में देख रहा है; क्योंकि इस आंदोलन में धर्माचार्य, संत, विविध संप्रदायों के अनुयायी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश, अधिवक्तागण, संपादक, पत्रकार, उद्योगपति, विचारक, डॉक्टर , इतिहास विशेषज्ञ, स्वरक्षा प्रशिक्षण विशेषज्ञ इत्यादि समाज के विविध घटक सहभागी हुए हैं । इस आंदोलन के माध्यम से इन सभी हिन्दुओं का एक अभेद्य संगठन बन रहा है । वर्तमान स्थिति में भारत के २२ राज्यों के साथ ही बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, मलेशिया इन देशों के हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने मिलकर एक वज्र संगठन बना लिया है । हिन्दू राष्ट्र के विषय को गांव-गांव में पहुंचाने के लिए समिति की ओर से जिलास्तरीय, राज्यस्तरीय तथा प्रांतीय स्तर पर भी अधिवेशन आयोजित किए जाते हैं । इसी के एक भाग के रूप में २१ से २३ सितंबर २०१८ की कालावधि में देहली में भारत सेवाश्रम संघ, स्वामी प्रणवानंद मार्ग, श्रीनिवासपुरी में उत्तर भारतीय हिन्दू अधिवेशन का आयोजन किया गया है । इसमें देहली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड इन उत्तर भारत के राज्यों के हिन्दुत्वनिष्ठ भाग लेंगे । अखिल भारतीय स्तर से लेकर इस प्रकार के प्रांतीय अधिवेशनों से हिन्दू संगठन का स्वरूप अब केवल तात्कालीन अथवा वैचारिक स्तर का ही नहीं रहा है, अपितु इस संगठन को अब निरंतर क्रियाशीलता भी प्राप्त हुई है । यह एकजुटता ही भारत को हिन्दू राष्ट्र के रूप में घोषित करने का कारण बनेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है !

 

हिन्दू राष्ट्र की स्थापना - अखिल भारत अभियान !