सियासत, सत्ता बदल रही है नीतीश बाबू …….
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सियासत, सत्ता बदल रही है नीतीश बाबू …….
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Thursday,01 February , 2018)

Bihar News, 1 Februry 2018 :  आज बात फिर पूराने दिनों की करते हैं 2010 का वो दौर जहाँ बिहार में अगर कोई नेता था वो सिर्फ नीतीश कुमार ना आगे ना कोई पिछे बस शिखर पर खड़ा वह एकलैता नेता जिसका नाम नीतीश कुमार था, अपने सुशासन और विकास के कार्य के कारण पूरे देश में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम का डंका था । वो कहते हैं ना कि हर एक कहानी मे एक मोड आता है और वह पूरा किस्मत ही बदल देता है और साल 2013 मे ऐसा ही हुआ देश के दो दिग्गज नेताओं के मन मुटाव के कारण भाजपा की सबसे पुरानी और सबसे ताकतवर साथी का अलगाव हो गया इसके बाद सियासत के दुनिया में जहाँ मोदी को एक के बाद एक चुनावों में जीत मिला वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार को लोकसभा चुनाव में मिली हार के अपने राजनीतिक तरीके पर फिर से आत्मचिंतन को मजबूर हो गए और उन्हें ना चाहते हुए भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पडा। साथ ही 2014 के चुनाव में भाजपा को रामविलास पासवान और उपेन्द्र कुशवाहा का समर्थन मिला। कुशवाहा और नीतीश कुमार का  दुश्मनी पूरे बिहार को पता है कि जब पहली बार बिहार में जदयू और भाजपा सरकार आई तो नैतिक रूप से कुशवाहा को मुख्यमंत्री पद मिलना चाहिए था क्योंकि वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे परंतु उन्हें मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ और दोनों नेताओं के बीच तकरार अभी भी जारी है। समय बलवान होता है और समय तेजी से बदल रहा है जहाँ नीतीश कुमार मोदी के खिलाफ सबसे बड़े विरोधी थे आज फिर उन्हीं के साथ है , हालांकि नीतीश कुमार और भाजपा में फिर से  दरार पैदा हो गया है। मसलन अगर आप आज की बात करे जहाँ कुशवाहा ने शिक्षा सुधार श्रृंखला की पहल किया तो उसमें कुशवाहा के समर्थन में उनकी सहयोगी पार्टी जदयू और भाजपा दोनों ने साथ नही दिया , ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कुशवाहा राजद के साथ जाएंगे क्योंकि कुशवाहा को राजद का पूरा समर्थन था। ऐसे में सवाल माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी बनता है कि वह हमेशा कहते समाज सुधार कार्यक्रम में किसी को पार्टी के बाड़े में नही बल्कि एक साथ एकजुट होकर  बिहार की जनता के साथ होना पर मुख्यमंत्री के इस कथन को अब मै नही मानता क्योंकि जो दिख रहा है वह साफ दिखाता है कि नीतीश कुमार ने भी बिहार से ऊपर राजनीति को रखा है। ऐसे आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बहुत कुछ देखने को मिल सकता है।  

 

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