तीन कृषि कानूनों की वापिसी से पहले आंदोलन खत्म नही किया जाएगा, किसानों ने किया फैसला
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तीन कृषि कानूनों की वापिसी से पहले आंदोलन खत्म नही किया जाएगा, किसानों ने किया फैसला
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Saturday,19 June , 2021)

Palwal News, 19 June 2021 (bharatdarshannews.com) : किसानों के आंदोलन को लगातार शान्तिपूर्वक चलते हुए पूरे 205 दिन हो चुके हैं तथा आंदोलन में लगभग 515 किसान शहीद हो चुके हैं।आज भी अटोंहा मोड पर किसानों का धरना सिरिचंद महास्य औरंगाबाद की अध्यक्षता में आयोजित किया गया तथा संचालन राजकुमार ओलिहान घुघेरा ने किया।किसान धरने पर हरियाणा के मुख्य मंत्री उप मुख्यमंत्री पर किसानो के आन्दोलन की निंदा करने व किसानों को असमाजिकतत्व कहने पर सभी किसानों ने दोनों हाथ उठाकर निंदा प्रस्ताव पास किया  तथा  उनके सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया तथा कहा  की तीन कृषि कानूनों की वापिसी से पहले आंदोलन खत्म नही किया जाएगा।धरना में सर्वसम्मति से बीजेपी के स्थानीय नेता के खिलाफ़ भी निंदा प्रस्ताव पारित किया।किसानों ने बेरोजगारी को लेकर भी अभियान चलाने का फैसला किया। किसान नेता महेन्दरसिंह चौहान व धर्मचंद घुघेरा ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार के मुखिया,मंत्री व सलाहकार एक सवाल लगातार कर रहे हैं कि तीन कृषि कानूनों में संयुक्त किसान मोर्चा कमियों को स्पष्ट करे।यह सवाल ही सिरे से जनता को गुमराह करने वाला व गलत है।संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले ही बहुत विस्तार व तर्कसंगत तरीके से समझाया है कि कानूनों के मूल उददेश्य में मूलभूत खामियां हैं।कानूनों में किसानों के हितों में भीषण हानि और कॉर्पोरेट के हितों की रक्षा के प्रावधान हैं।तथ्य यह भी है कि भाजपा सरकार ने राज्य सरकारों के संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण किया है जो स्वीकार्य नहीं है।11दौर की बातचीत  का वीडियो फुटेज इन सभी बातों का सबूत है कि कानूनों की वापिसी से ही वर्तमान गतिरोध का समाधान किया जा सकता है।ऐसे में अब उन्ही निराधार तर्कों को सामने लाना जो सरकार ने साढे चार महीने पहले पेश किए थे अस्वीकार्य हैं।और यह स्पष्ट दिखाताहै कि सरकार आज भी अपने अहंकार पर खडी है।सरकार आंदोलन को लम्बा खींच कर उसे थकाना चाहती है जो सरकार की भारी भूल साबित होगी। किसान आंदोलन व उसके नेताओं तथा उसके समर्थकों के  इन्टरनेट पर प्रतिबंध लगाने से संकेत मिलता है कि सरकार जनता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को छीनना चाहती है,जबकि अन्तराष्ट्रीय मंचों पर स्वतंत्रता के पक्ष में ब्यान दे रही है।किसान मोर्चा आज भी बातचीत के लिए तैयार है।मोर्चा द्वारा सरकार को लिखे पत्र के बावजूद सरकार का बातचीत ना करना यही दर्शाता है कि सरकार अपने अहंकार में है। धरने में किसान नेता , रमेशचन्द सौरौत, दरियाब सिंह, चंद्र मुनी , रुपराम तेवतिया, भगीरथ बैनीवाल, नरेन्द्र सहरावत, राजेश रावत बहीन, रणजीत औरंगाबाद, रोशनलाल कुंडू, बीरसिंह औरंगाबाद,, जयदेव व  ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

तीन कृषि कानूनों की वापिसी से पहले आंदोलन खत्म नही किया जाएगा, किसानों ने किया फैसला