स्मार्ट सिटी की तर्ज पर बनेंगे 10 विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय
Breaking News :

PUNJAB

स्मार्ट सिटी की तर्ज पर बनेंगे 10 विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Saturday,15 October , 2016)

Bilaspur News, 15 October 2016 : स्मार्ट सिटी की तर्ज पर अब देश के 10 उच्च शिक्षण संस्थाओं को विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसमें टेक्नीकल संस्थान, मैनेजमेंट, आर्ट कॉलेज या केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल हो सकेंगे। प्रत्येक चयनित संस्था को पांच-पांच सौ करोड़ स्र्पए मिलेंगे। योजना में शामिल होने के लिए उन्हें अपना विजन बताने के साथ ही उपलब्धि गिनानी होगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने आम सूचना जारी कर विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय को लेकर योजना सार्वजनिक की है। सचिव प्रो.जसपाल एस संधू द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि एमएचआरडी ने देश में 10 विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय विकसित करने की योजना बनाई है। इसके लिए ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार कर ली गई है। इस योजना के लिए पांच हजार करोड़ रुपए का बजट भी तैयार किया गया है। इसका मकसद मौजूदा उच्च शिक्षण संस्थानों को देश की टॉप यूनिवर्सिटी में शामिल कराना है। इस प्रोजेक्ट में चयन की प्रक्रिया स्मार्ट सिटी की तर्ज पर होगी। भाग लेने वाली संस्थाओं को अपनी योजना के मुताबिक फंड खर्च करते हुए उपलब्धि दर्शानी होगी। जिस संस्थान को अतिरिक्त फंड की जरूरत होगी वह भी मुहैय्या कराया जाएगा। चयन की प्रक्रिया रेगुलेशन बनने के बाद शुरू होगी। फिलहाल एमएचआरडी ने रेगुलेशन के लिए ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार करने 28 अक्टूबर तक आम राय मांगी है। वर्ष 2020-21 तक टारगेट : केंद्र सरकार की योजना के मुताबिक चयनित संस्थाओं को विभिन्न् मदों के लिए पांच सौ करोड़ रुपए का फंड दिया जाएगा। इसे सत्र 2016-17 से 2020-21 तक खर्च करने होंगे। इस बीच संस्थाओं को विकास की रफ्तार में कमी नहीं आने देना होगा। मतलब विजन के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा। ताकि संस्था को विश्वभर में नई

चयन की प्रक्रिया आसान नहीं : विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय की दौड़ में शामिल होने चयन की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। जानकारी के मुताबिक मौजूदा संस्थाओं को वर्ल्ड रैकिंग में टॉप 500 में होना अनिवार्य है। इसी तरह राष्ट्रीय रैंकिंग में भी बेहतर ग्रेडिंग होना जरूरी है। संस्थाओं को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से प्रमाण पत्र मिल चुका हो। संस्थाओं में रिसर्च पर लगातार बेहतर काम किया गया हो। जरूरत के हिसाब से विदेशी फेकल्टी पर स्टाफ मौजूद हो। इसके अलावा बेस्ट कोर्स व विदेशी छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हों।

यूजीसी का नहीं होगा दखल : योजना की कई प्रमुख खासियत हैं। मसलन, इन संस्थाओं पर यूजीसी की बिल्कुल दखल नहीं होगी। वे स्वतंत्र रूप से प्रवेश प्रक्रिया व शुल्क का निर्धारण कर पाएंगे। खुद कोर्स डिजाइन करने में सक्षम होंगे। विदेशी यूनिवर्सिटी से अनुबंध पर भी सरकार दखल समाप्त कर देगी। पूरी तरह से फाइनेंसियल ऑटोनामी मिलेगी। 30 फीसदी कोर्स ऑनलाइन मोड में चला सकेंगे। मेरिट के आधार पर विदेशी छात्रों को सीधे प्रवेश दे सकेंगे।

सीयू व बीयू दौड़ में काफी पीछे : विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय की दौड़ में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय और बिलासपुर विश्वविद्यालय काफी पीछे हैं। नैक ग्रेडिंग की बात हो या फिर सुविधा संसाधन। राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय रैकिंग में भी बुरी स्थिति है। रिसर्च व विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के मामले में भी फिसड्डी साबित हो रहे हैं। ऐसे में इन संस्थाओं को अभी खुद जमने में वक्त लगेगा। प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों की स्थिति भी लगभग यही है। यूजीसी ने विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय को लेकर नोटिस जारी किया है। इसका मकसद देश की उच्च शिक्षण संस्थाओं को और ऊंचा उठाकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर लाना है। केंद्र सरकार रिसर्च व एजुकेशन में कई बड़े बदलाव की तैयारी में है। यह युवाओं के साथ समाज के लिए अच्छा संकेत है।

प्रो.जीडी शर्मा कुलपति बिलासपुर विश्वविद्यालय

 

 

स्मार्ट सिटी की तर्ज पर बनेंगे 10 विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय