मन में ठाना की देश को वर्ष 2025 तक थेलासीमिया मुक्त करना है
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FARIDABAD

मन में ठाना की देश को वर्ष 2025 तक थेलासीमिया मुक्त करना है
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Monday,14 September , 2020)

फाउंडेशन अगेंस्ट थेलासीमिया द्वारा की जा रहे कार्य सराहनीय  : सीमा त्रिखा

Faridabad News, 13 September 2020 (bharatdarshannews.com) : फाउंडेशन अगेंस्ट थेलासीमिया की जब 1995 में नीव रखी तो उस समय थेलासीमिया जैसी बीमारी का नाम बहुत सारे डॉक्टरों ने भी नहीं सुना था।  बच्चो का इलाज करना तो बहुत बड़ी बात थी। उस समय बच्चा थेलासीमिया ग्रस्त बच्चा पैदा होता था पता भी नहीं चल पता था उसको बीमारी ही क्या है अधिकतर बच्चे एक दो साल में ही इस दुनिया से विदा हो जाते थे। जिन बच्चो को पता चल जाता था की बच्चा थेलासीमिया ग्रस्त है तो इलाज के आभाव में बच्चा 10-12 साल ही ज़िंदा रह पता था। उस समय संस्था का एक सपना था किसी तरह बच्चे को समय पर रक्त मिले व् दवा मिले जो संस्था के अथक प्रयासों से लगभग पुरे हिंदुस्तान में पूरा हो गया है। संस्था को बने इस वर्ष पच्चीस वर्ष हो गए है तो संस्था ने एक  मन में ठाना की इस देश को वर्ष 2025 तक थेलासीमिया मुक्त करना हैआज थैलासीमिया मुक्ति के लिए एक थेलासीमिया जाँच शिविर का आयोजन एक नंबर बी ब्लॉक कम्युनिटी सेंटर में  लगाया गया। शिविर का शुभारम्भ बढकल विधायिका सीमा त्रिखा, मेयर सुमन बाला,सरदार मोहन सिंह भाटिया, मोहिंदर नागपाल, विकास कुमार सेक्रेटरी रेड क्रॉस, डॉ एम् पी सिंह ने दीप प्रज्वलित कर के किया।आज 63 लोगो ने आकर थेलासीमिया करियर का टेस्ट करवाया अगर ये सब लोग अपनी रिपोर्ट के अनुसार परिवार का प्लान करेंगे तो उनके यहां थेलासीमिया ग्रस्त बच्चा नहीं पैदा होगा।
आज ही 85 थेलासीमिया ग्रस्त बच्चो को निशुल्क दवाइया दी गयी जिसमे मुकेश अग्रवाल जी, इनर व्हील क्लब ऑफ़ फरीदाबाद सेंट्रल, व् इनर व्हील क्लब ऑफ़ फरीदाबाद इंडस्ट्रियल टाउन का योगदान रहा। इस अवसर पर सरदार जे. पी. सिंह, सरदार उजागर सिंह, विमल खेंडेलवाल, लोचन सिंह भाटिया, बिट्टू रतरा, राकेश भाटिया, राधे शाम भाटिया, सुशील भाटिया, संजू, सोनू, संजय अरोरा, सरदार रविंदर सिंह राणा, कंवलजीत सिंह, परमजीत सिंह, प्रदीप खत्री, वेद भाटिया, बी. डी. भाटिया, दीपक मंगला, आर्ट ऑफ़ लिविंग से पी. डी. शर्मा, मिटा साह, अजय कपूर, रजनी बहल, आनंद कांत भाटिया, कमल खत्री, जोगिंदर चावला, नरेंद्र सिंह रजनीकर, संजय आहूजा, गुलशन बग्गा, प्रमोद भाटिया, राजिंदर भाटिया, हरीश क्लासिक, रवि भाटिया, कैलाश गुगलानी, राजेश भाटिया, अजय जी, स्वाति चांडक, प्रवेश मालिक, टीम मिशन जाग्रति, टीम परिबद्ध भारतीय,  विजय कंटा, पवन कुमार, अमरजीत सिंह अरोरा, नीरज कुकरेजा उपस्तिथ थे। इस शिविर को लगाने में रोटरी क्लब ऑफ़ दिल्ली साउथ सेंट्रल व् प्रतिबद्ध भारतीय का पूरा सहयोग रहा। साथ ही श्री मुकेश अग्रवाल जी ने आश्वाशन दिया की अक्टूबर माह में एक और विशाल शिविर का आयोजन किया जायेगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग टेस्ट तो करवाए ही साथ इस बात की जानकारी भी समाज में जाये की सिर्फ इसी टेस्ट से ही थेलासीमिया ग्रस्त बच्चो का पैदा होना रोका जा सकता है। सिर्फ इसी टेस्टसे ही समाज को थेलासीमिया मुक्त किया जा सकता है। अभी तक जो बच्चे पैदा हुए है वो नासमझी के कारण ही पैदा हुए है, जानकारी का अभाव था। अब जानकारी भी है व् अपने परिवार को बचाने का मौका भी। अगर ये सब होते हुए भी किसी के यहा थेलासीमिया ग्रस्त बच्चा पैदा होता है तो वो बच्चा आपको जीवनभर माफ़ नहीं करेगा।   फाउंडेशन अगेंस्ट थेलासीमिया के महासचिव रविंद्र डुडेजा ने बताया की लोगो की सोच है वो तो स्वस्थ है उनको यह टेस्ट करवाने की कोई जरूरत नहीं है। जो होगा देखा जायेगा। परन्तु जो होगा देखा जायेगा का मतलब है। एक मासूम को जीवन भर रक्त चढ़ाने के लिए पैदा करना। जानकारी होते हुए ऐसा करना एक पाप ही है। सदी के महा नायक श्री अमिताभ बच्चन जी भी तो थेलासीमिया करियर है।  थेलासीमिया करियर लोग दिखने में स्वस्थ ही नज़र आते है। उनका थैलासीमिया करियर होना सिर्फ एचबीए 2 टेस्ट से ही पता चल सकता है। अगर दोनों साथी थेलासीमिया करियर होंगे तभी थैलासीमिया ग्रस्त बच्चा पैदा हो सकता है। आज विज्ञान ने बहुत तरक्की कर ली अगर दोनों साथी थेलासीमिया करियर है तो गर्भस्थ शिशु का पता चल जाता है की बच्चा कैसा पैदा हो रहा है। अगर स्थि एक करियर है एक नहीं है तो उनके यहां थेलासीमिया ग्रस्त बच्चा नहीं पैदा होगा। ज्यादा से ज्यादा थेलासीमिया करियर ही पैदा हो सकता है। शिवर को सफल बनाने में संस्था के प्रधान हरीश रतरा महासचिव रविंदर डुडेजा,   अंजलि, रूपम, अमरजीत सिंह, सोमनाथ डुडेजा, नीरज कुकरेजा, पवन कुमार, पंकज चौधरी, गुरध्यान अदलखा जी  का विशेष सहयोग रहा.   संस्था के प्रधान हरीश रतरा ने बताया की  इतना कुछ होते हुए भी आज थेलासीमिया ग्रस्त बच्चे का थेलासीमिया परिवार में आगमन होता है तो समाज व् सरकार पर एक कलंक के समान है। अंत में प्रतिबद्ध भारतीय के संस्थापक विजय कंटा उपस्तिथ लोगो का धन्यवाद किया।

मन में ठाना की देश को वर्ष 2025 तक थेलासीमिया मुक्त करना है