राहगीरी 15 दिसम्बर को तिगावं अनाज मण्डी में की जाएगी आयोजित : उपायुक्त अतुल कुमार
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FARIDABAD

राहगीरी 15 दिसम्बर को तिगावं अनाज मण्डी में की जाएगी आयोजित : उपायुक्त अतुल कुमार
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Saturday,14 December , 2019)

Faridabad News, 14 December 2019 (bharat darshan news) :  उपायुक्त अतुल कुमार के मार्गदर्शन में आगामी राहगीरी 15 दिसम्बर को तिगावं अनाज मण्डी में प्रातः सात से दस बजे तक आयोजित की जाएगी । उन्होंने बताया कि राहगीरी में विधायक राजेश नागर बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे। सरकार के दिशा-निर्देशानुसार राहगीरी के लिए प्रशासनिक तौर पर  कार्यवाहक नोडल अधिकारी फरीदाबाद के एसडीएम अमित कुमार को नियुक्त किया गया है । जबकि डीसीपी डॉ अर्पित जैन को पुलिस   अधिकारी के तौर ओवर आल कार्यकारी नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। राहगीरी का मुख्य थीम उर्जा सरक्षण रहेगा।

क्यों जरूरी है उर्जा सरक्षण-:

आधुनिक युग विज्ञान का युग है । मनुष्य विकास के पथ पर बड़ी तेजी से अग्रसर है, उसने समय के साथ स्वयं के लिए सुख के सभी साधन एकत्र कर लिए हैं । इतना होने के बाद और अधिक पा लेने की अभिलाषा में कोई कमी नहीं आई है बल्कि पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है । मनुष्य की समय के साथ उसकी असंतोष की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। कल-कारखाने, मोटर-गाड़ियाँ, रेलगाड़ी, हवाई जहाज आदि सभी उसकी इसी प्रवृत्ति की देन हैं । उसके इस विस्तार से संसाधनों के समाप्त होने का खतरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है । प्रकृति में संसाधन सीमित हैं । दूसरे शब्दों में, प्रकृति में उपलब्ध ऊर्जा भी सीमित है। विश्व की बढ़ती जनसंख्या के साथ आवश्यकताएँ भी बढ़ती ही जा रही हैं । दिन-प्रतिदिन सड़कों पर मोटर-गाड़ियों की संख्या में अतुलनीय वृद्धि हो रही है । रेलगाड़ी हो या हवाई जहाज सभी की संख्या में वृद्धि हो रही है । मनुष्य की मशीनों पर निर्भरता धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है । इन सभी मशीनों के संचालन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है । परंतु जिस गति से ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ रही है, उसे देखते हुए ऊर्जा के समस्त संसाधनों के नष्ट होने की आशंका बढ़ने लगी है । विशेषकर ऊर्जा के उन सभी साधनों की जिन्हें पुन: निर्मित नहीं किया जा सकता है । उदाहरण के लिए पेट्रोल, डीजल, कोयला तथा भोजन पकाने की गैस आदि । पेट्रोल अथवा डीजल जैसे संसाधनों रहित विश्व की परिकल्पना भी दुष्कर प्रतीत होती है । परंतु वास्तविकता यही है, कि जिस तेजी से हम इन संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं उसे देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब धरती से ऊर्जा के हमारे ये संसाधन विलुप्त हो जाएँगे । अत: यह आवश्यक है कि हम ऊर्जा संरक्षण की ओर विशेष ध्यान दें। अथवा इसके प्रतिस्थापन हेतु अन्य संसाधनों को विकसित करें क्योंकि यदि समय रहते हम अपने प्रयासों में सफल नहीं होते तो संपूर्ण मानव सभ्यता ही खतरे में पड़ सकती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार हमारे देश में भी ऊर्जा की आवश्यकता दिन पर दिन विकास व जनसंख्या वृद्‌धि के साथ बढ़ती चली जा रही है । ऊर्जा की बढ़ती माँग आने वाले वर्षो में आज से तीन या चार गुणा अधिक होगी । इन परिस्थितियों में भारत सरकार की ओर से ठोस कदम उठाने की अवश्यकता है । इस दिशा में अनेक रूपों में कई प्रयास किए गए हैं जिनस कुछ हद तक सफलता भी अर्जित हुई है । ‘बायो-गैस’ तथा अधिक वृक्ष उत्पादन आदि इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं । पृथ्वी पर ऐसे ऊर्जा संसाधनों की कमी नहीं है, जो प्रदूषण रहित विश्व भर में ऊर्जा संरक्षण व ऊर्जा के नवीन श्रोतों को विकसित करने के महत्व को समझा जा रहा है । सभी देश सौर-ऊर्जा को अधिक महत्व दे रहे हैं तथा इसे और अधिक उपयोगी बनाने व इसके विकास हेतु विश्व भर के वैज्ञानिकों द्‌वारा अनुसंधान जारी हैं । जहाँ तक भारत की स्थिति है, हमारे देश में पेट्रोलियम ऊर्जा का एक बड़ा भाग खाड़ी के तेल उत्पादक देशों में आयात किया जाता है । अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कभी-कभी कच्चा तेल इतना महँगा हो जाता है कि इसे खरीद पाना भारतीय तेल कंपनियों के वश में नहीं होता । तब सरकार या तो तेल मूल्यों में वृद्‌धि कर इस घाटे की भरपाई करती है अथवा तेल कंपनियों को सीमा-शुल्क आदि में छूट देकर स्वयं घाटा उठाती है । दोनों ही स्थितियों में बोझ देश के उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है । हमें आशा है कि वैज्ञानिक ऊर्जा के नए संसाधनों की खोज व इसके विकास में समय रहते सक्षम होंगे । इसके अतिरिक्त यह आवश्यक है कि सभी नागरिक ऊर्जा के महत्व को समझें और ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक बनें । यह निरंतर प्रयास करें कि ऊर्जा चाहे जिस रूप में हो उसे व्यर्थ न जाने दें । विज्ञान ने बहुत सारे आविष्कार किये हैं, किंतु इनमें बिजली का आविष्कार सबसे महत्वपूर्ण है। क्योंकि कई अन्य आविष्कार ऐसे हैं जो बिजली के उपयोग से ही संभव हो पाये हैं और ये वे आविष्कार हैं जिन्हें हम दिन-प्रतिदिन प्रयोग में लाते हैं। बिजली के प्रयोग से मनुष्य का जीवन बहुत ही सरल हो गया है। बिजली ने हमें रेडियो, टेलीविज़न, पंखा, प्रकाश, काम सरल बनाने के लिए कम्प्यूटर मनोरंजन के कई साधन और न जाने कितनी अननिगत सुविधायें प्रदान की हैं। क्योंकि बिजली को जमा कर के नहीं रखा जा सकता है इसलिए हमें इसका सोच समझ कर उपयोग करना चाहिये। जिससे सभी लोगों की जरूरत पूरी हो सके। हमारे देश में कई स्थान ऐसे हैं जहाँ बिजली की पहुँच नहीं हो पाई है। बिजली की आवश्यकता दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। इसे बचाने के लिए हमें अन्य विकल्पों की ओर भी ध्यान देना होगा। जैसे बायो गैस एवं सौर ऊर्जा का प्रयोग। हमें वृक्षों की संख्या बढ़ाने के लिए वृक्षारोपण कार्यों की ओर कदम उठाना होगा। सौर ऊर्जा के प्रयोग हेतु जनसाधारण को जागरुक करना होगा और इसके महत्व को लोगों को समझाना होगा। सरकार द्वारा इसे प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनायें लागू की गई हैं तभी भी अभी आम नागरिक इसके प्रयोग से वंचित हैं। कुछ बातें हमें अपने आम जीवन में भी ध्यान रखनी होगी जैसे बिजली के उपकरण उपयोग में नहीं आ रहे हों तो उन्हें बन्द कर दिया जाये। अपने रिफ्रिजरेटर का दरवाजा बन्द करना न भूलें। बिजली निगम ने भी  साधारण बल्ब की जगह एलईडी (LED) बल्ब का प्रयोग करना चाहिये क्योंकि उनमें बिजली की कम खपत होती है। वाशिंग मशीन में कपड़े तभी धोयें जब कपड़ों की मात्रा ज्यादा हो। एक-आध कपड़ा धोने के लिए वाशिंग मशीन का प्रयाग कर बिजली का दुरुपयोग न करें। बिजली के पुराने उपकरणों को प्रयोग न करें वे ज्यादा बिजली की खपत करते हैं। इनके स्थान पर नये बिजली के उपकरण प्रयोग करें। यदि हम इन सब बातों का ध्यान रखेंगे तो बिजली को बचाने में बहुत बड़ा योगदान दे पायेंगे।  प्रत्येक व्यक्ति इस सुविधा का प्रयोग कर सके इसके लिए हमें आवश्यकता न होने पर बिजली से चलने वाले उपकरण बन्द कर देने चाहियें और जितना हो सके पानी का भी बचाव करना चाहिये व पेड़ों को ज्यादा से ज्यादा लगाना चाहिये। यदि हम बिजली बचायेंगे तभी हम इस ग्रह को भी बचा पायेंगे।

राहगीरी 15 दिसम्बर को तिगावं अनाज मण्डी में की जाएगी आयोजित : उपायुक्त अतुल कुमार