कांग्रेस हरियाणा में सीएम के चेहरों के बीच दिख रही  उलझी
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कांग्रेस हरियाणा में सीएम के चेहरों के बीच दिख रही  उलझी
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Monday,30 September , 2019)

Chandigarh News, 30 september 2019 : हरियाणा में बीजेपी के मुकाबले चुनाव लडऩे से पहले कांग्रेस आपसी लड़ाई में उलझी दिख रही है। भले ही सीएम कोई एक व्यक्ति ही होगा, लेकिन 7 दावेदारों ने कांग्रेस की लड़ाई को मुश्किल बना दिया है। यही वजह है कि विपक्षी दल कांग्रेस को 7 मुख्यमंत्रियों की पार्टी बता रहे हैं। बीते 20 सालों में से 10 साल तक हरियाणा में शासन चला चुकी कांग्रेस के लिए बीजेपी से मुश्किल फिलहाल गुटबाजी से निपटना है।

पार्टी में हर इलाके या यूं कहें कि हर तबके के नेताओं में एक सीएम का चेहरा दिख रहा है।  पूर्व सीएम हुड्डा के अलावा कुमारी शैलजा, किरण चौधरी भी दावेदार हैं. इसके अलावा अहीरवाल बेल्ट के नेता कैप्टन अजय यादव भी सीएम फेस के तौर पर खुद को प्रॉजेक्ट कर रहे हैं. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर और राहुल गांधी क। करीबी कहे जाने वाले रणदीप सुरजेवाला भी सीएम पद के दावेदारे में से हैं।

खिलाडिय़ों के जरिए खेल की तैयारी में बीजेपी: 2014 के विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद 2019 के आम चुनाव में एक बार फिर से सूपड़ा साफ करा चुकी कांग्रेस के सामने जमीन बचाने की चुनौती है।कांग्रेस ने गुटबाजी को थामने और एक नेतृत्व स्थापित करने की कोशिश में पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा को आगे किया है। उनके विरोधी खेमे के माने जाने वाले अशोक तंवर को हटाकर पार्टी ने दलित नेत्री कुमारी शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इसके अलावा हुड्डा को चुनाव प्रबंधन कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया है।

दावों के बाद भी नहीं दिखता, ऑल इज वेल : असल में हुड्डा ने 18 अगस्त को अपने राजनीतिक भविष्य को तय करने के लिए एक रैली का आयोजन किया था और उनकी दबाव बनाने की यह रणनीति काम कर गई। चर्चा थी कि यदि हाईकमान ने उनकी नहीं सुनी तो फिर वह पार्टी छोड़ सकते हैं. हालांकि कुमारी शैलजा और हुड्डा के बीच भी एक दौर में अदावत थी, लेकिन फिलहाल एक खेमे में नजर आ रहे हैं। पार्टी की एकता को लेकर शैलजा ने हाल ही में कहा था, हम बंटे हुए नहीं हैं। हर नेता का काम करने का अपना तरीका है। सभी पार्टी को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। हमारे बीच में गुटबाजी जैसी बात मीडिया की उपज है। भले ही शैलजा ने यह टिप्पणी की हो, लेकिन पार्टी के भीतर ऑल इज वेल नहीं दिखता।

तंवर और हुड्डा कैंपों में कई बार हो चुकी मारपीट :  प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाए जाने के बाद तंवर ने कहा था कि वह शैलजा और हुड्डा का उसी तरह से साथ देंगे, जैसे उन्होंने उनके अध्यक्ष रहते हुए दिया था। बीते कई दशकों से हरियाणा में कांग्रेस खेमेबंदी का शिकार रही है, लेकिन अब मोदी युग में उसकी यह कमजोरी बुरी तरह से नुकसान पहुंचा रही है।

अक्टूबर, 2016 में दिल्ली में तत्कालीन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सामने ही हुड्डा और तंवर कैंप के नेताओं में मारपीट हो गई थी।  यही नहीं इसी साल जुलाई में गुलाम नबी आजाद के आगे भी नेताओं में जूतमपैजार हो गई थी।  2005 के भजनलाल की तरह फंसे हुड्डा  कांग्रेस के पावर सेंटर माने जाने वाले नेताओं की जुगलबंदी ने 2005 में अच्छा काम किया था और पार्टी को 67 सीटें मिली थीं, जबकि आईएनएलडी को महज 9 सीटें हासिल हुईं। तब हुड्डा, शैलजा, राम प्रकाश, बिरेंद्र सिंह डूमरखान, पूर्व सीएम भजन लाल और राव इंद्रजीत सिंह खुद को सीएम के तौर पर पेश कर रहे थे। इसी जंग के बीच भजन लाल ने अपनी अलग पार्टी बना ली थी। इस बार हुड्डा गुटबाजी के बीच कांग्रेस में रहते हुए भी भजन लाल की तरह फंसे दिख रहे हैं।

कांग्रेस हरियाणा में सीएम के चेहरों के बीच दिख रही  उलझी