बाल सलाह परामर्श एवं कल्याण केंद्र की स्थापना
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FARIDABAD

बाल सलाह परामर्श एवं कल्याण केंद्र की स्थापना
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Monday,20 May , 2019)

Faridabad News, 20 May 2019 : हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा राज्य स्तरीय परियोजना बाल सलाह, परामर्श व् कल्याण केन्द्रों की स्थापना के अन्तर्गत फरीदाबाद जिले में सेक्टर-16 स्थित संत निरंकारी पब्लिक स्कूल के किशोरावस्था के बच्चों हेतु मनोवैज्ञानिक परामर्श द्वारा किसी भी तरह की चिन्ता, तनाव या मानसिक दवाब से होने वाली समस्याओं के निवारण हेतु जिले के 10वें एवं राज्य के 59वें केन्द्र की स्थापना राज्य परियोजना नोडल अधिकारी अनिल मलिक के द्वारा की गयी | कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला बाल कल्याण अधिकारी सुन्दर लाल खत्री व् स्कूल प्राचार्या सुनीता खरबंदा व स्कूल की मुख्य अध्यापिका ममताअरोड़ा द्वारा की गयी | स्कूल के मैनेजर एन एस चौहान ने सभी का स्वागत किया । इस विशेष अवसर पर उनके साथ राज्य परियोजना कोऑर्डिनेटर उदय चन्द, परामर्शदात्री अन्जू यादव, आशा पांडे, लाखन सिंह लोधी, समाज सेवी एस के टूटेजा, स्कूल अध्यापिका पूनम राठी इत्यादि भी मौजूद रहे | इस अवसर पर " किशोरावस्था में चुनौतियां : अभाव-वश पैदा होने वाली समस्याएं एवं दुष्प्रभाव" विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया | मुख्य वक्ता के तौर पर सम्बोधित करते हुए राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने बताया कि किशोरावस्था के दौरान शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, नैतिक व भावनात्मक विकास अत्यधिक होता है | इस दौरान बहुत से परिवर्तन शरीर, मन और मस्तिष्क में चलते रहते हैं | किशोर मन को बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, खुद से बहुत से सवाल जवाब करने होते हैं | हमसमूह के दोस्तों के साथ व सामाजिक रिश्तो में बेहतर तालमेल को लेकर भी असमंजस होता है | उत्सुक, व्याकुल, अशान्त किशोर मन नए-नए परिवर्तन को समझना चाहता है लेकिन अनुभव और जानकारी का अभाव कई बार चिन्ता में डाल देता है | ऐसे में हार्मोनल बदलाव के दौरान बच्चों के मनोभाव व् निजी स्वच्छता को समझते हुए अभिभावकों विशेष तौर से माता-पिता द्वारा बच्चों को उचित मार्गदर्शन देने की जरूरत होती है | इस उम्र में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण स्वभाविक है क्योंकि किशोर अपरिपक्व होता है, उसे सही और गलत की बहुत ज्यादा समझ नहीं होती | माता-पिता, घर के बड़े बुजुर्ग कहानियों के माध्यम से बच्चों को जरूरी जानकारी दे सकते हैं | शैक्षणिक संस्थान भी व्यवहारिक व नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए समय-समय पर लघु नाटिका या छोटे समूह में रोल प्ले करके बच्चों की मदद कर सकते हैं | माता-पिता की समझ, जानकारी व् बातें कहने और समझाने का तरीका इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है कि किशोर मन में भावना उमड़ती हैं, इच्छाएं हिलोरे ले रही होती हैं, तरह-तरह की चेतावनी इसलिए भी होती है कि किशोर मन अत्यधिक उत्सुक तथा जिज्ञासु होता है | भावुकता, व्याकुलता की वजह से बच्चों को एक बेचैनी सी मन में होती है | सहजतापूर्वक शान्त मन व् धैर्यशील तरीके से हंसते मुस्कुराते चेहरे के साथ अगर बच्चों को उचित परामर्श दिया जाएगा तो बच्चे चुनौतियों का सामना बखूबी कर सकते हैं अन्यथा इनके दुष्प्रभाव के कारण बच्चे जीवन की दिशा भटक सकते हैं, गलत संगति में जा सकते हैं, पढ़ाई के प्रति अरुचि पैदा हो सकती है | ऐसे में माता-पिता व शिक्षकों को बच्चों के साथ बातें साझा करने के लिए खुला मंच चाहिए, जिसमें भरोसा तत्पश्चात बातों को समझ कर समाधान की तरफ ले जाना जरूरी है | बेहतर संवाद से दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात कह सकें, उन्हें धैर्य से सुना जाए और समाधान ढूंढा जाए | जागरूकता, सतर्कता व् सावधानी बहुत जरूरी है |

 

 

 

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