देश की वर्तमान अर्थव्यवस्था और आगे का रास्ता : दीपक जैन
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EDITORIAL

देश की वर्तमान अर्थव्यवस्था और आगे का रास्ता : दीपक जैन
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Tuesday,23 June , 2020)

Faridabad News, 23 June 2020 (bharatdarshannews.com)  :  कोरोना का संकट ऐसे विकट समय पर आया है जब देश अर्थव्यवस्था में 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनामी की तरफ छलांग लगाने की तैयारी में था। मोदी सरकार ने अपनी तरफ से पूरी प्लानिंग और हर पहलू से विचार करते हुए किसी इंतजाम में कोई कसर नहीं छोड़ी हुई थी।  इधर एफआईआई की तरफ से हमने 13 फरवरी 2020 को एक कार्यक्रम का दिल्ली में आयोजन किया, जिसमे राजनीतिक नेतृत्व, प्रबुद्ध वर्ग, जनप्रतिनिधि और उद्यमी सम्मिलित हुए और मिलकर हमने चर्चा रखी कि हमारे सामने कौन-कौन से ऐसे अवसर उपस्थित होंगे जो देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की तरफ भी ले जाएंगे और साथ ही व्यापार और उद्योगों में लगे हुए लोगों के लिए नए अवसर भी पैदा करेंगे। उन नए अवसरों पर हमने मिलकर विचार-विमर्श किया। लेकिन अचानक चीन की तरफ से आया कोरोना का संक्रमण भारत समेत दुनिया के अधिकांश देशों को आर्थिक रूप से तोड़ गया। ना सिर्फ अर्थव्यवस्था की रीड़ की हड्डी टूट गई बल्कि आम जन को गरीबी, भुखमरी, बदहाली से जूझना पड़ा और लगभग सभी देशों को एक समान हालात में झुका गया। लेकिन इस विपत्ति के काल में भी भारत सरकार ने अप्रत्याशित रूप से साहसिक निर्णय करके 20 लाख करोड़ रुपये का जो पैकेज घोषित किया, वह सिर्फ मोदी जैसी बड़ी सोच का व्यक्ति ही कर सकता है। मैं यह लेख इसलिए नहीं लिख रहा कि मुझे मोदी की तारीफ करनी है या करने का शौक है बल्कि मैं हैरान हूं कि विपत्ति के काल में भी इस व्यक्ति की सोच सकारात्मक, आशावादी और हालात के विपरीत एक बहुत बड़ी परिकल्पना लिए हुए हैं। आज देश में हम देखते हैं कि लगभग सभी क्षेत्र के लोग इस बात का शोर मचा रहे हैं कि उन्हें इस पैकेज में कुछ ख़ास नहीं मिला लेकिन मैं इससे थोड़ी अलग सोच रखता हूं। कभी हमारी सोच में यह भी तो आना चाहिए कि इस विपत्ति काल में हमने देश के लिए क्या किया? अधिकार के साथ-साथ क्या हम कुछ दायित्वों की चर्चा भी करें?  लघु और मध्यम दर्जे के उद्योगों के लिए तीन लाख करोड़ का पैकेज घोषित हुआ। अधिकांश लोगों का मानना है कि बैंक लोन देते हुए कतरा रहे हैं और उन्होंने मझोले और बड़े उद्योगों को भी एमएसएमई के दर्जे में डालकर सारा वित्तपोषण मझोले उद्योगों को दे दिया। मार्च के महीने से ही मेरा यह मानना है कि हमें केवल 3 महीने की तैयारी से नहीं चलना चाहिए। मेरे अनुसार डेढ़ से 2 साल इस देश को वापिस पटरी पर आने में लगेगा और उसके अंदर 30 से 40% उद्योग, जो एक तरह से बीमार यूनिट थे या रुग्णता की कगार पर थे, वह शायद ही दोबारा चल पाए।  ऐसे में हमारे लघु और मझोले उद्यमियों के लिए एक ही रास्ता है कि व्यापार के नए आयाम तलाश करें। यूनिवर्सिटी, कॉलेजेस, रिसर्च इंस्टीट्यूशंस इन सब को ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए और बड़ी त्वरित गति से उसको लागू करना चाहिए जिससे हमारे लघु और मझोले उद्यमियों आयु के इस कगार पर पहुंच कर भी वह नए रास्ते और नए व्यापार खोज सकें और नए रास्तों पर चलने की मन स्थिति बना सकें। यह तो रही उद्योगों की बात, मैं आता हूं अब देश की बात पर। स्थिति थोड़ी गंभीर है क्योंकि इस कोरोना के संकट से पहले हमने बैंकों को विलय किया। कुछ बैंकों को आर्थिक पोषण किया लेकिन वास्तविकता यह है कि हमारा बैंकिंग सिस्टम कांग्रेस के शासन काल से या यूं कहें पिछली सरकार के कुशासन से खाली हो चुका है। बैंकों में बैलेंस शीट तो हैं लेकिन बैंकों के अंदर पैसा नहीं है। आज आवश्यकता है कि देश को ही आर्थिक पुनर्जीवन दिया जाए। हमारे देश के अंदर  सामान्य गति से चलने के लिए भी कम से कम 50 लाख करोड रुपए की आवश्यकता है। तब जाकर के यह देश का आर्थिक ढांचा पुनर्जीवित होगा होगा। जिसमें खाली पड़े हुए सरकारी बैंकों के अंदर रु15 लाख करोड़ डालने से वह सुचारु रूप से चलेंगे। इसके पश्चात ₹5 लाख करोड़ की ग्रांट जो तुरंत सहायता के रूप में सरकार ने पिछले 2 महीनों में खर्च की है। इसके अलावा यदि हम जीएसटी का नुकसान जोड़ें तो लगभग 12 लाख करोड रुपए का और लॉकडाउन के कारण से तेल के नुकसान को मैं 10लाख करोड़ रूपया गिनता हूं। बाकी का पैसा हम देखें तो सरकार को खर्चा चलाने के लिए और विकास के काम और गति के साथ चलने के लिए चाहिए। 

मैं विस्तार से तो नहीं लिखूंगा लेकिन तीन संकेत भारत सरकार को अवश्य दूंगा।

पहली बात भारत सरकार को अपना सरकारी खर्च कम करना चाहिए खास तौर पर इस आर्थिक तंगी के दौर में अधिकारियों और मंत्री को और अन्य जनप्रतिनिधियों को केवल इकोनामी क्लास से सफर करना चाहिए। कोई बड़ा काम नहीं पर इससे लोगों में सादगी से चलने की भावना आएगी। एकमुश्त भारी-भरकम राशि की व्यवस्था नहीं हो सकती इसलिए कई योजनाएं निकालकर उस धन की व्यवस्था करनी चाहिए।  दूसरी बात, एक योजना विदेशों में जो भारतीयों का काला धन है और काले धन द्वारा अर्जित संपत्तियां हैं उनको स्वैच्छिक रूप से घोषित करके नई योजना निकालें ताकि वह धन 40 से 50 परसेंट टैक्स देकर देश में वापस आ सके। तीसरी बात, हमारे देश में प्रचुर मात्रा में सोना उपलब्ध है सरकार उस सोने को 20 वर्ष की अवधि के लिए अपने बैंकों में रख सकती है और चार परसेंट ब्याज लोगों को उस पर दे सकती है इस योजना से जो देश में 30,000 टन सोना है उस सोने की काफी मात्रा बैंकों में आ सकती है। बिना अतिरिक्त क़र्ज़ लिए सरकार धन की व्यवस्था कर सकती है। इसके लिए PM को सरकारी IAS लॉबी को एक तरफ़ कर के कुछ चिन्हित लोगों की विशेष टीम का सहयोग लेने से बात बन सकती है। मुझे पूर्ण विश्वास है की देश के पास आत्मविश्वास की पूँजी है, कार्ययोजना है, और मजबूत नेतृत्व के साथ साथ इच्छाशक्ति है तो अगले डेढ़ से दो वर्ष में हम पिछला संकट भूल कर  एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभरेंगे।

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