मैली हो गयी नेताओं की चादर इतनी कि उसका रंग ही आने लगा है काला नजर
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EDITORIAL

मैली हो गयी नेताओं की चादर इतनी कि उसका रंग ही आने लगा है काला नजर
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Wednesday,12 June , 2019)

Mukhi Deepak/12 June 2019 : राजनीतिज्ञ अपना भरोसा खोते जा रहे हैं। अगर कहीं कोई एक प्रतिशत ईमानदारी दिखती है तो आश्चर्य होता है कि यह कौन है ?  

पर हल्दी की एक गांठ लेकर थोक व्यापार नहीं किया जा सकता है। यही लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे बड़ा संकट है। अहमदाबाद शहर में नरोदा से भाजपा विधायक बलराम थवानी का वायरल हुआ वीडियो तो देशवासियों ने देखा होगा जिसमें वह एक महिला को लात-घूसों से पीट रहे हैं, यह कैसा लोकतंत्र है जिसमें रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं, अब तक तो पुलिस ही भक्षक थी, अब तो जनप्रतिनिधि भी भक्षक हो रहे हैं। ये कैसे जनप्रतिनिधि हैं जो पहले वोट मांगते हैं, फिर जीत के बाद लोगों को लात मारते हैं। लोकतंत्र के मुखपृष्ठ पर बहुत धब्बे हैं, अंधेरे हैं, वहां मुखौटे हैं, गलत तत्त्व हैं, खुला आकाश नहीं है। मानो प्रजातंत्र न होकर सज़ातंत्र हो गया। क्या यही उन शहीदों का स्वप्न था, जो फांसी पर झूल गये थे ?

राजनीतिक व्यवस्था और सोच में व्यापक परिवर्तन हो ताकि अब कोई महिला पानी की व्यवस्था की गुहार लगाने पर हिंसा की शिकार न हो। लोकतन्त्र शालीनता एवं शिष्टाचार से चलता है अगर यह शालीनता एवं शिष्टाचार ही खत्म हो गई तो फिर बचेगा क्या ? जब सांसद और विधायक निर्वाचित होकर आते हैं तो पार्टी के बड़े नेता उन्हें लोकतंत्र का पाठ क्यों नहीं पढ़ाते हैं ? निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिये लोकतंत्र का प्रशिक्षण आज की बहुत बड़ी जरूरत है। ऐसा प्रशिक्षण न मिलने के कारण जनप्रतिनिधि स्वयं को सेवक नहीं, शहंशाह मानते लगते हैं। तभी तो किसी महिला के पानी की व्यवस्था करने की गुहार लगाने पर वे आपा खो देते हैं, आक्रोषित हो जाते हैं, क्रोधित हो जाते हैं। इन्हीं स्थितियों में विधायक बलराम थवानी पहले तो मारपीट कर देते हैं फिर उन्हें जब अपने राजनीतिक जीवन में संकट के बादल मंडराते दिखे तो न केवल महिला से माफी मांगी बल्कि उससे राखी भी बंधवाई। अगर राजनीतिज्ञ मर्यादित आचरण, शालीनता एवं शिष्टाचार छोड़कर ऐसी शर्मनाक हरकतें करने लगे तो लोकतंत्र खतरे में आ जायेगा। वैसे तो भारत का लोकतंत्र बड़े-बड़े बाहुबली एवं आपराधिक पृष्ठभूमि के नेताओं के शर्मनाक कृत्यों का गवाह रहा है, बार-बार शर्मसार हुआ है। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले बाहुबली धनबल से संसद और राज्य विधानसभाओं में पहुंचते रहे हैं। यही कारण है कि राजनीति का चरित्र गिर गया और साख घटती जा रही है।

मैली हो गयी नेताओं की चादर इतनी कि उसका रंग ही आने लगा है काला नजर