7000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा भारत: मुकेश अंबानी
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7000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा भारत: मुकेश अंबानी
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Friday,01 December , 2017)

Mumbai News, 1 December 2017 : रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा है, भविष्य में भारत दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनोमिक लीडर बन सकती है. वो पंद्रहवें हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में हिस्सा लेने पहुंचे थे. दिल्ली में आयोजित समिट में उन्होंने कहा कि 13 साल पहले मैं इस समिट में आया था तब हिंन्दुस्तान 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था थी. "उस वक्त मैंने कहा था कि 20 साल तक यह देश 5000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगी. मुझे ख़ुशी है कि मेरा कहा जल्द ही सही साबित होने वाला है, क्योंकि आज देश इसी राह पर है. आने वाले 10 सालों में ये 7000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकती है." मुकेश अंबानी ने कहा कि भारत आने वाले सालों में विश्व लीडर बन सकता है और देश के लिए आने वाले तीन दशक बेहद अहम होंगे. उन्होंने और क्या-क्या कहा, जानिए 7 अहम बातें-

1. 2047 में जब भारत अपनी आज़ादी के सौ साल का जश्न मनाएगा, इसी वक्त के आसपास चीन अपने गणराज्य बनने के सौ साल की ख़ुशी मना रहा होगा. आज सारी दुनिया चीन और भारत के विकास की बात कर रहा है लेकिन मेरे लिए ये आश्चर्य की बात नहीं.

इतिहास को देखें तो 17वीं शताब्दी से पहले भारत और चीन सबसे धनी देशों में गिने जाते थे. लेकिन 300 साल के विदेशी शासन के बाद यहां की अर्थव्यवस्था पिछड़ गई थी. लेकिन अब फिर से विकास का केंद्र इन दोनों देशों का रुख़ कर रही है. ये इन दोनों देशों के लिए पुनर्जन्म के जैसा है.

2. इक्कीसवीं सदी के मध्य में भारत के विकास की गति चीन के विकास की गति से अधित तेज़ होगी और पूरे विश्व को इसमें अधिक रुचि होगी. भारत विश्व को एक बेहतर और अलग विकास मॉडल प्रस्तुत करेगा. इस मॉडल के मुख्य स्तंभ होंगे- तकनीक, गणतंत्र, सुशासन और एक दूसरे के प्रति सहानुभुति की संस्कृति.

3. नई तकनीक और ऊर्जा के नए स्रोत को पूरी और व्यापक तौर पर अपनाए बिना कोई देश कभी विश्व शक्ति के रूप में विकास नहीं कर पाया है. पहले औद्योगिक क्रांति के दौरान कोयले और स्टीम की शक्ति का इस्तेमाल किया गया था और ये इंग्लैंड में शुरू हुई थी. इस कारण शक्ति का केंद्र चीन और भारत के हाथ से हट कर यूरोप की तरफ झुक गया.

दूसरी औद्योगिक क्रांति के दौरान बिजली और तेल (ईंधन) का इस्तेमाल किया गया और इस दौरान विकास के कारण शक्ति का केंद्र यूरोप से हटा और अमरीका की तरफ चला गया.

तीसरी औद्योगिक क्रांति में इल्क्ट्रोनिक्स और इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ज़ोर शोर से हुआ और इससे अमरीका और जापान को लाभ मिला. विकासशील देशों में से चीन को भी इस क्रांति से कुछ फ़ायदा मिला क्योंकि उसने चीज़ों के उत्पादन में अपना सिक्का जमा लिया. देखने वाली बात है कि इस क्रांति ने एक नई दुनिया बनाई है और इसे जल्दी अपनाने वालों के लिए नई राहें पैदा की हैं.

4. पहली और दूसरी औद्योगिक क्रांति से भारत लाभ नहीं ले सका. तीसरी औद्योगिक क्रांति में भी भारत ने आगे बढ़ने की कोशिश ही की. लेकिन ऐसा चौथी औद्योगिक क्रांति के साथ नहीं होगा क्योंकि ये भारत के साथ में है.

इस क्रांति के मुख्य स्तंभ हैं डेटा कनेक्टिविटी, कम्प्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. मुझे लगता है कि अगले सालों में मानव सभ्यता इतनी तेज़ी से प्रगति करेगी जितना दुनिया ने बीते 300 सालों में नहीं किया.

5. मैं मानता हूं कि आने वाले कल में इंटेलिजेंट सर्विसेस ही सबसे बड़ा बाज़ार होगा. हम आज सुपर इंटेलिजेंस के दौर में पहुंच चुके हैं. जैसे चीन से उत्पान से लाभ उठाया और विश्व शक्ति बनने की रेस में शामिल हुआ वैसे ही भारत सुपर इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर सकता है. और तो और भारत पूरी दुनिया को इंटेलिजेंट सर्विसेस मुहैया करा सकता है.

6. मैं मानता हूं कि चौथी औद्योगिक क्रांति का फ़ायदा उठाते हुए भारत विश्व का लीडर बन सकता है. अपने इस विश्वास के तीन कारण बताते हुए उन्होंने कहा इसका पहला कारण है कि भारत युवाओं का देश है जो जोश और ऊर्जा से भरे हैं जो देश को दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्टअप बना सकते हैं.

भारत में बेहतर ढाचागत सुविधाएं नहीं होना असल में एक तरह से वरदान की तरह है क्योंकि इसका मतलब है कि हमारे पास लिगेसी टेक्नोलॉजी (पुरानी तकनीक) नहीं है और हमें पीछे देखने की ज़रूरत भी नहीं. हम तकनीक के मामले में कई क़दम आगे चल सकते हैं. तीसरा कारण है इसके लिए ज़रूरी नेतृत्व और मौजूदा प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया का सपना.

7. मोबाइल ब्रॉडबैंड की लोगों तक पहुंच में कुछ साल पहले तक भारत 100 नंबर पर था लेकिन जियो के लॉ़न्च के बाद वो इसमें नंबर वन हो गया है. आज भारत चीन अधिक इंटरनेट का इस्तेमाल करता है. इंटरनेट के ज़रिए भारत शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य सेवा में सुधार कर सकता है और इससे भारत के विकास में मदद मिलेगी.

समिट के दौरान मुकेश अंबानी से पूछा गया कि वो अर्थव्यवस्था के बारे में जब इतना कुछ जानते हैं तो देश के वित्त मंत्री क्यों नहीं बनते.

इस पर चुटकी लेते हुए मुकेश ने कहा, "मैं राजनीति में नहीं व्यापार में हूं".

 

 

बीबीसी हिन्दी

 

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