उद्योगों का भाजपा के खिलाफ ठंडा पड़ता आक्रोश
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उद्योगों का भाजपा के खिलाफ ठंडा पड़ता आक्रोश
(Kiran Kathuria) www.bharatdarshannews.com Wednesday,29 November , 2017)

दरों में कटौती से शांत हुआ कारोबारियों का गुस्सा
कई उद्योगों में दिखने लगे हैं नोटबंदी के फायदे
कांग्रेस के प्रति कारोबारियों में रुझान नहीं

Ahmedabad News, 29 November 2017 :  गुजरात विधानसभा चुनावों में अब कुछ ही दिन बचे हैं और ऐसा लगता है कि हालिया नीतिगत बदलावों खासकर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ बना माहौल अब शांत पड़ गया है। अधिकांश वस्तुओं की दरों में हाल में की गई कटौती से राज्य के कई औद्योगिक केंद्रों में सरकार के खिलाफ नाराजगी दूर हो रही है। इनमें कपड़ा, हीरा, सिरैमिक्स और दवा-रसायन उद्योग केंद्र शामिल हैं। मोरबी विट्रिफाइड टाइल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के जी कुंदरिया ने कहा, 'अब कोई बड़ी समस्या नहीं है और जीएसटी दर में कटौती के बाद लोग खुश हैं। निश्चित रूप से सरकार ने कुछ क्षतिपूर्ति कर ली है और ऐसा लगता है कि उसकी यह तरकीब कारगर रही।'

लेकिन अभी भी कई उद्योगों को नई कर प्रणाली के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें भरूच-अंकलेश्वर पट्टी में स्थित रसायन इकाइयां और सूरत के हीरा कारोबारी शामिल हैं। दक्षिण गुजरात के अंकलेश्वर, वापी और भरूच में रसायन और थोक दवाओं के कारोबारी निर्यात रिफंड की स्थिति से चिंतित हैं। एक बड़ी कंपनी के प्रवर्तक ने कहा, 'इस एक मुद्दे को छोड़ दिया जाए तो दक्षिण गुजरात के उद्योगों में सरकार के खिलाफ कोई गुस्सा नहीं है। नोटबंदी से हुई परेशानियों का दौर गुजर चुका है और जीएसटी क्रियान्वयन की समस्याऐं भी दूर हो चुकी हैं। निर्यात रिफंड के मुद्दे पर चीजें स्पष्ट नहीं हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लोग मौजूदा सरकार के खिलाफ वोट देंगे।' आम धारणा के विपरीत स्थानीय उद्योग ने स्वीकार किया कि नोटबंदी के फायदे अब दिखने लगे हैं। अहमदाबाद के ज्वैलरी एवं बुलियन ट्रेडिंग मार्केट मानेकचौक के जाने माने ज्वैलर और व्यापारी काल्पनिक चोकसी एक दिलचस्प रुझान की बात करते हैं। उन्होंने कहा, 'पिछले एक साल में चेक और ऑनलाइन बैंकिंग से लेनदेन की संख्या बढ़कर 70 फीसदी हो गई है जो पहले 40 फीसदी थी। लोगों को अब पैन बताने में कोई गुरेज नहीं है और बड़े सौदे ऑनलाइन बैंकिंग के जरिये हो रहे हैं।' अलबत्ता छोटे व्यापारियों को अब भी जीएसटी के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनके लिए ऑनलाइन फाइलिंग का अनुपालन करना मुश्किल हो रहा है। सूरत में हीरे के छोटे कारोबारी अब भी नकदी में लेनदेन करते हैं। एक कारोबारी ने कहा, 'उनके पास कोई चारा नहीं है। अगर वे जीएसटीएन में पंजीकरण करते हैं और नए फॉर्म का अनुपालन करने के लिए किसी अकाउंटेंट की सेवाएं लेने हैं तो उनका पूरा मुनाफा इसी में चला जाएगा।' छोटी और मझोली कंपनियों पर भी इसका असर देखा जा रहा है और सभी क्षेत्रों के ताजा निवेश में कमी आई है। गुजरात चेंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष शैलेश पटवारी ने कहा कि वाहन कलपुर्जा उद्योग, दवा-रसायन और कपड़ा क्षेत्र में 4 वर्षों के दौरान सालाना 25 से 30 फीसदी ताजा निवेश आया लेकिन पिछले एक साल के दौरान यह वृद्घि इकाई अंक में रही है। इसका परिणाम यह हुआ कि गुजरात में कुल 468,000 छोटी और मझोली कंपनियों में से करीब 20 फीसदी बंद पड़ी हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि विभिन्न औद्योगिक केंद्रों में भाजपा के खिलाफ माहौल न केवल ठंडा पड़ रहा है और इसके दम पर कांग्रेस गुजरात की चुनावी वैतरणी पार नहीं कर सकती है। सनरिया टेक्निकल टेक्सटाइल्स के प्रबंध निदेशक तुषार पटेल ने कहा, 'जाति के नाम पर भाजपा को नुकसान नहीं होगा। नोटबंदी और जीएसटी के कारण मंदी भाजपा के लिए नुकसानदेह हो रही है क्योंकि इनसे गुजरातियों की आजीविका प्रभावित हुई है। अलबत्ता इससे भाजपा के 150 सीट पाने का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है लेकिन भाजपा के हारने की संभावना नहीं है।'

सोहिनी दास और विनय उमरजी / अहमदाबाद 

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